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यहां की तक़रीबन ढाई लाख आबादी को नहीं नसीब हो रहा है पीने का पानी

Pure drinking water crisisजमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला का एक बड़ा इलाका जहां की आबादी तकरीबन ढाई लाख है. वहां के लोगों को पिछले कई दशकों से शुद्ध पानी नसीब नहीं होता. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मीलों दूरी तय कर जमशेदपुर शहर से सटे इलाकों में जुस्को के पेयजल पर आश्रित रहना पड़ता है. टाटा-मोटर्स की दीवार से सटे एक नल के पानी से पेयजल लेने को लेकर यहां रात 2 बजे से ही लोगों की कतार देखी जाती हैं जो पूरे दिनभर और देर रात तक बदस्तूर जारी रहता है.

यह नजारा है जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा के अंतिम छोर से सटे टाटा मोटर्स की चारदीवारी का. यहां शुद्ध पेयजल का एक टैग लगा है, यहां पानी लेने के लिए तकरीबन 10 से 12 किलोमीटर दूर से लोग यहां आते हैं. यह सिलसिला रात 2 बजे से शुरू होता है, और दिनभर लोगों का आना-जाना यहां लगा रहता है जो देर रात तक चलता रहता है.


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मीलों दूर से आते हैं लोग

खबरों की तलाश में जब हमारे संवाददाता की नजर यहां पड़ी और लोगों से वस्तुस्थिति की जानकारी मिली तो बात हैरानी कर देने वाली सामने आई. बड़े-बड़े गैलन, बाल्टी, बोतल और पात्र लिये लोग पैदल या फिर दुपहिया वाहन और ऑटो के सहारे यहां शुद्ध पेयजल के लिए मीलों-मील दूर से आते हैं. प्यास बुझाने को कड़ी मेहनत करते हैं. जब हमने इस पूरी कहानी के तह तक जाने की कोशिश की तो पता चला कि शुद्ध पानी से मरहूम एक बड़ी आबादी के लोगों का एक मात्र सहारा यहां लगी एक नल है, जिससे 24 घण्टे पानी निकलता है. यहां आए लोगों का कहना था कि उनके इलाके में सरकार पानी तो आपूर्ति करती है, पर वह पीने, खाना बनाने में इस्तेमाल नहीं हो सकता, क्योंकि पानी दूषित है. चापाकल से भी बदबूदार दूषित पानी निकलता है, जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालता है.




इस एक नल से बुझती है लाखों लोगों की प्यास

आपको बता दें कि इस एक मात्र नल से जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा और जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र की लाखों लोगों  की प्यास बुझती है, वह भी कड़ी मेहनत और कई किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद. इन दोनों विधान सभा क्षेत्र के इलाके मसलन, सोपोडेरा, सलगाझुड़ी,सरजामदा, परसुडीह, जोजोबेड़ा, बावनगोड़ा, शंकरपुर, राहरगोड़ा, मखदमपुर समेत दर्जनों इलाकों के लोग शुद्ध पेयजल को लेकर तमाम व्यस्तता के बावजूद यहां आते हैं. शंकरपुर निवासी बताते हैं कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और सीएम से गुहार लगाई जा चुकी है, पर नतीजा अब तक सिफर रहा.

बहरहाल, यह कैसी व्यवस्था है जो पिछले डेढ़ दशक से लोगों को एक अदद शुद्ध पेय जल उपलब्ध नहीं कर सका. जमशेदपुर शहर में शुद्ध पानी की किल्लत नहीं, पर शहर से सटे बड़े इलाकों में यह सुविधा अब तक नहीं मिलना, चिराग तले अंधेरा वाली कहावत को चरितार्थ करने के लिए काफी है.



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