रांची: जीर्णोद्वार के नाम पर बर्बाद हुआ पहाड़ी मंदिर, नीचे से धंस रही है नींव

ranchi pahadi mandir in danger रांची: राजधानी रांची में गर्व से खड़ा है लोगों की आस्था का प्रतीक पहाड़ी मंदिर. झारखण्ड राज्य बनने के बाद आई कई सरकारों ने इसे और खूबसूरत बनाने के लिए अलग-अलग प्रोग्राम चलाए. पहले इसकी सीढियां बनाई गई. इसके बाद सीढ़ी चढ़ते हुए थक जाने पर आए श्रधालुओं के बैठने के लिए चबूतरे बनाए गये. लेकिन आज हालत ऐसी है मानो लगता है कि कभी भी ये मंदिर धंस सकता है.

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सावन की शुरुआत 28 जुलाई से हो रही है. 30 को सावन की पहली सोमवारी होगी. रांची के पहाड़ी मंदिर में खासकर सावन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. लेकिन इस बार अगर आप पहाड़ी मंदिर जा रहे हैं, तो थोड़ी सावधानी जरुर बरतें. क्या पता आप किसी एक्सीडेंट का शिकार हो जाएं?

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पहाड़ी मंदिर का अस्तित्व खतरे में है. जर्जर हो चुके पहाड़ी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा रहा था, लेकिन काफी सुस्त गति से.  फिलहाल मंदिर के जीर्णोद्धार का काम आठ महीने से बंद है. जीर्णोद्धार के दौरान की गई तोड़-फोड़ से मुख्य मंदिर की दीवारें भी कहीं-कहीं से दरक चुकी हैं. इस सावन में लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन को जाएंगे. कायदे से सावन के पूर्व ही जीर्णोद्धार का लक्ष्य पूरा कर लेना चाहिए था, जो कि संभव नहीं हो पाया. बारिश के इस मौसम में जर्जर पहाड़ी से मिट्टी का कटाव भी शुरू हो गया है.

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जीर्णोद्धार के नाम पर मुख्य मंदिर के बगल का धर्मशाला पहले से ही तोड़ दी गई है. वहां पानी भरने से मुख्य मंदिर को भी खतरा उत्पन्न हो गया है. पहाड़ी के साथ मंदिर के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

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पूरब व पश्चिम दिशा में लगे पेड़ को काट दिया गया है. कुछ पेड़ जर्जर हो चुके हैं. पहाड़ी पर पार्क, रेस्टोरेंट बनाने की योजना भी है. पश्चिम की तरफ से भी पहाड़ी पर उगे पेड़ को काट कर रास्ता बनाया गया है. यह काम भी आधा-अधूरा है. सड़क बनाने के नाम पर पहाड़ी को क्षतिग्रस्त किया और पेड़ काटे गए. अब पहाड़ी नंगी हो चुकी है. वहीं गार्डवाल भी काफी जमीन छोड़ कर बनाया गया है.





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