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हाल-ए-रिम्स : बेटे को कंधे पर लटकाये जन्म प्रमाण पत्र के लिए नौ महीने से चक्कर काट रही मां

रांची : लगता है अनियमितताओं ने रिम्स में अपना डेरा जमा रखा है. या ये कहें कि रिम्स प्रबंधन अस्पताल की कमियों को दूर करना ही नहीं चाहती. शायद यही वजह है कि राज्य का सबसे बड़े अस्पताल अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं कर रहा है.

लोहरदगा से आती है महिला

ताजा मामला सोमवार का है. यहां एक महिला अपने नौ महीने के बच्चे को कंधे पर लिए रिम्स का चक्कर काट रही है. लोहरदगा जिला के हिसरी नया टोली की रहने वाली यह महिला कोई एक-दो दिन से चक्कर नहीं काट रही. उसे अस्पताल का चक्कर काटते हुए पूरे नौ महीने बीत गये. काम सिर्फ इतना था कि उसे अपने नवजात बेटे का जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल से लेना है.

महिला ने बताया कि 13 अक्टूबर 2017 को उसने रिम्स में ही एक बच्चे को जन्म दिया था. जिसका नाम उसने अनीश उरांव रखा. महिला ने कहा कि बच्चे का जन्म तो अच्छे से हो गया, पर जन्म के नौ महीने बीतने के बाद भी जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिला. बर्थ सर्टिफिकेट के लिए महिला लगातार अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड डिपार्टमेंट का चक्कर लगाती रहती है पर उसे हमेशा निराशा ही हाथ लगती है. उसने कहा कि उसे बार-बार लोहरदगा से छोटे से बच्चे को लेकर आने में काफी परेशानी होती है. दिन भर यहां लाइन में खड़े रहने के बाद भी काम नहीं होता तो बहुत दुख होता है. बार-बार लोहरदगा से रांची ने में पैसे भी खर्च होते हैं.



अविलम्ब प्रमाणपत्र जारी करने का स्वास्थ्य मंत्री ने दिया था निर्देश

बता दें कि सिर्फ वह महिला ही नहीं, ऐसे कई लोग हैं जो रिम्स के मेडिकल रिकॉर्ड डिपार्टमेंट के ढुलमुल रवैये से परेशान हैं. कई लोग तो ऐसे हैं जिन्हें मृत्यु और जन्म प्रमाण पत्र लेने के लिए सालों चक्कर काटना पड़ा. जबकि इस मामले पर खुद स्वास्थ्य मंत्री और प्रधान स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने निर्देश दिया था. उन्होंने कर्मचारियों को कहा था कि प्रमाणपत्र के लिए किसी को भी दौड़ाया नहीं जाय. जन्म और मृत्यु के साथ ही प्रमाण पत्र निर्गत करने का निर्देश दिया गया था. बावजूद इसके अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई प्रभाव होता नहीं दिख रहा है.



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