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सम्मानजनक सीटों पर समझौता हुआ तो ही महागठबंधन में शामिल होगा राजद

राजद

रांची : झारखंड में राजद के अंदर जारी उठा पटक के बीच प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ता समागम का आयोजन किया गया. राजद के कार्यकर्ता समागम में बड़ी संख्या में जुटे पार्टी कार्यकर्ता और समर्थकों ने नये प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह का अभिनंदन किया. राजद प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह ने एक सप्ताह के अंदर प्रदेश कमेटी का गठन और जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा का एलान किया है. वहीं राजद ने सम्मानजनक सीटों पर समझौता के साथ महागठबंधन में शामिल होने की शर्त रखी है.

झारखंड राजद में जारी उठा – पटक और घमासान के बीच प्रदेश कार्यालय का यह नजारा जीवंत संगठन और ऊर्जावान राजनीति के लिहाज से कार्यकर्ताओं की ये उपस्थिति जरुरी है. खासकर तब जब राजद प्रदेश अध्यक्ष पद पर आसीन होने के बाद अभय सिंह का अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित हो. राजद प्रदेश कार्यालय में लंबे समय के बाद कार्यकर्ताओं की ये भीड़ देखने को मिली. कार्यकर्ता समागम के बाद नये प्रदेश अध्यक्ष ने एक सप्ताह के अंदर प्रदेश कमेटी का गठन और जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा का डेड लाइन तय कर दिया है.  राजद 5 जुलाई को पार्टी का स्थापना दिवस पूरे उत्साह और जोश के साथ मनायेगी. वहीं आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन की मजबूती के लिहाज से प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा.

झारखंड राजद ने नये सिरे से संगठन को फिर से खड़ा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके तहत राजद प्रदेश के सभी 81 सीटों पर सांगठनिक पहलकदमी तेज करेगी. बात चाहे सदस्यता अभियान की हो या बूथ स्तर पर कमेटी निर्माण की. राजद का फोकस लालू यादव के संदेश के साथ आम जनता के बीच जाना रहेगा.  प्रदेश राजद ने महागठबंधन में शामिल होने को लेकर संगठन के अंदर आम राय बनाने का प्रयास किया है. हालांकि महागठबंधन में राजद की इंट्री सम्मानजनक सीटों पर होने वाले समझौते की शर्त पर पूरी होगी. सम्मानजनक सीट नहीं मिलने पर राजद अपनी अलग राह भी चुन सकती है.

लोकसभा चुनाव के पहले और चुनावी परिणाम के बाद राजद में जारी घमासान पर विराम लगाने की कवायद जारी है. राजद के नाराज नेताओं के बयान का भी बहुत ही सुलझे हुये अंदाज में जवाब दिया जा रहा है. राजद के नेता इस बात को साबित करने में लगे हैं कि राजद से कोई नाराज नहीं और सभी नेता राजद का झंडा बुलंद कर रहे हैं. राजद छोड़कर जाने वाले कब के चले गए  और पार्टी के कार्यकर्ता कल भी राजद के साथ थे  और आगे भी साथ ही रहेंगे.

बिहार से अलग हुये झारखंड की राजनीति में राजद का राजनीतिक कद समय के साथ बढ़ने के बजाय घटता ही जा रहा है. संसदीय राजनीति में कम होते विधायक और सांसद के बाद सिकुड़ता संगठन राजद की हकीकत को बयां करता है. वर्तमान राजनीति में राजद के पास झारखंड में ना तो विधायक है और ना ही सांसद. संगठन का हश्र भी कुछ ऐसा है कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के अंदर सीटों की दावेदारी पर राजद को काफी मशक्कत करनी होगी. क्यूंकि राजद के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती लालटेन की बुझती हुई लौ को बचाने की है और खुद के घर को रौशन करने की.

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