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जून से लेकर सितंबर तक पाया जाने वाला रुगड़ा प्रोटीन और विटामिन से है भरपूर

Rugada rich protein-vitaminsरांची : मानसून शुरू हो चुका है बारिश में खाने के शौकीन लोग खाने के व्यंजन को खूब पसंद करते हैं. तीन-चार दिनों की बारिश से ही बाजार में रुगड़ा जो एक प्रकार का मशरूम है उसकी बिक्री शुरू हो गई है.

इसे फुटकल, पुटो ओर वेज मटन के नाम से भी जाना जाता है. कुछ लोग इसे बटन मशरूम भी कहते हैं. इसकी पैदावर समूचे देश में होती है लेकिन झारखंड में अधिक होती है. इन दिनों ये 400 रुपए किलो की दर से बिक रहा है. जबकि चिकन करीब 150 रुपए किलो ही है. मशरूम की प्रजाति का रुगड़ा एक प्रकार का फंगस है, जो बरसात की शुरुआत में मिलता है. शाकाहारी लोग साल भर इसका इंतजार करते हैं. जून से लेकर सितंबर तक यह पाया जाता है. सावन में आमतौर पर नॉनवेज नहीं खाने वाले लोग भी इसका भरपूर सेवन करते हैं. कहा जाता है कि जितना बादल गरजेगा, उतना ही ज्यादा रुगड़ा निकलेगा.




रुगड़ा बेच रहा विक्रेता कहता हैं कि जंगल में रुगड़ा ढूंढ़ना आसान नहीं है. वहां सभी मिट्टी एक तरह ही दिखाई पड़ती है. काफी मुश्किल से लोग इसे ढूंढ़ पाते हैं. जंगल घूमने वाले आदिवासी परिवार इस कार्य में दक्ष होते हैं. पहले रांची में भी खूब मिलता था, लेकिन जंगल खत्म होने से इसकी पैदावार काफी कम हो गई है.

प्रोटीन और विटामिन में रीच यह सब्जी मशरूम जहां जमीन के ऊपर होता है, वहीं यह आलू की तरह जमीन से नीचे पैदा होता है. पेट की समस्याओं के लिए होमियोपैथी में रुगड़ा से दवाई बनाई जाती है. इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, रांची के सिविल सर्जन  डॉ. शिव शंकर कहते  हैं कि इसमे प्रोटीन का भरपूर स्रोत है.

बरसात की शुरुआत में बादल ज्यादा गरजते हैं. बादल गरजते ही जमीन के अंदर का रुगड़ा जमीन से बाहर दिखने लगता है. यह अधिकतर पेड़ों के आसपास होता है साल भर इंतेजर करने वाले लोगों के चहरे पर मुस्कान है क्योंकि बाजार में रुगड़ा आ चुका है.



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