साहब हस्ताक्षर कर दीजिए, नहीं तो मेरी मां मर जाएगी! (देखें वीडियो)

सत्यव्रत किरण, रांची : शहर के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के चिकित्सा उपाधीक्षक के दफ्तर के बाहर एक युवती घंटों से इंतजार कर रही थी. उसे इंतजार था रिम्स के चिकित्सा उपाधीक्षक का. सुबह के दस बज चुके थे पर चिकित्सा उपाधीक्षक दफ्तर नहीं पहुंचे थे. लड़की काफी चिन्तित नजर आ रही रही थी. पूछने पर पता चला कि वह रामगढ़ से आयी है. उसकी मां काफी बीमार है. अपनी मां के इलाज के लिए उसे किसी पर्ची पर चिकित्सा उपाधीक्षक का हस्ताक्षर चाहिए था.

पर्ची पर हस्ताक्षर होने के बाद निशुल्क जांच की मिलती है सुविधा

दरअसल, रामगढ़ जिला के गोला से एक युवती काजल अपनी 40 वर्षीय मां का इलाज कराने रिम्स पहुंची. उसने बताया कि उसकी मां प्रतिमा देवी काफी बीमार है. उसके पेट में पानी भर गया है. डॉक्टरों ने उसे जल्द जांच करा कर रिपोर्ट लाने को कहा है. पर अपनी मां की जांच कराने के लिए काजल के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे. अस्पताल से जांच करवाने के लिए उसे एक पर्ची दी गयी थी, जिस पर चिकित्सा उपाधीक्षक के हस्ताक्षर की आवश्यकता थी. उस पर्ची पर चिकित्सा उपाधीक्षक के हस्ताक्षर हो जाने से काजल की मां का सारा जांच निशुल्क कर दिया जाता.

काजल ने बताया कि काफी देर इंतजार करने पर भी चिकित्सा उपाधीक्षक से मुलाकात नहीं हुई. वहीं तैनात गार्ड से पूछने पर उसने डांट दिया. कहा कि एक बार बता दिए हैं, बार-बार नहीं बताएंगे.




6 साल के अक्षय को भी कराने हैं कई जांच

वहीं, कोडरमा से छह साल के मरीज को लेकर आए परिजन सुरेंद्र दास कहते हैं कि उनके मरीज अक्षय कुमार को डॉक्टरों ने कई जांच लिखे हैं. पर जांच के लिए उनक पास भी पर्याप्त पैसे नहीं हैं. निशुल्क जांच के लिए मुझे भी पर्ची पर साइन करवाना था, पर हस्ताक्षर करने वाला कोई नहीं है. उन्होंने बताया कि वो दो घंटे से इंतजार कर रहे हैं और उनके मरीज की स्थिति ठीक नहीं है.

गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए सरकार ने बनाया है प्रावधान

बता दें कि सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों के लिए यह प्रावधान बनाया है. जिसमें मरीज के परिजन को एक पर्ची दी जाती है. उस पर्ची पर अगर रिम्स के चिकित्सा उपाधीक्षक हस्ताक्षर कर देतें हैं, तो उस मरीज का सारा जांच अस्पताल में निशुल्क कर दिया जाता है.





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