पीएचडी डिग्री वाले शहाबुद्दीन की दास्तान, कैसे बना राजनीति और अपराध का खिलाड़ी


सीवान : बिहार के सीवान जिले को कौन नहीं जानता. भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का शहर कहा जाने वाला सीवान आज किसी और के नाम से भी जाना जाता है. हम बात कर रहे हैं सीवान के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन की. शहाबुद्दीन भारत के सबसे दबंग सांसदों में से एक हैं. उनका नाम मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूचि में शामिल है और कई तरह के आरोपों के कारण जेल में बंद हैं.

सीवान जिले के प्रतापपुर में जन्मे शहाबुद्दीन के बारे में लोगों का कहना है कि सीवान की राजनीति में अगर शहाबुद्द्दीन न हों तो फिर चुनाव का मुद्दा चाहे जो भी हो उसमें उबाल नहीं आ सकता. शहाबुद्दीन का जन्म 10 मई 1967 को हुआ था. अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रतापपुर से पूरी करने के बाद शहाबुद्द्दीन ने अपनी डिग्री डीएवी कॉलेज से पूरी की और उसके बाद राजनीति शास्त्र में एमए की उपाधि प्राप्त की. हालांकि उनका 2000 में मुजफ्फरपुर के बीआर अंबेडकर से पीएचडी की उपाधि प्राप्त करना विवादों में रहा. उन्होंने हिना शेख से शादी की थी, जो 2009 में सीवान लोकसभा सीट से राजद की तरफ से चुनाव लड़ी थीं और हार गई थीं. उनका एक बीटा और दो बेटियां हैं.

1980 में डीएवी कॉलेज से राजनीति में कदम रखने वाले शहाबुद्दीन के खिलाफ पहली बार 1986 में हुसैनगंज थाने में आपराधिक केस दर्ज हुआ. जिसके बाद उनके खिलाफ लगातार केस दर्ज होते चले गए और वो क्रिमिनल की हिस्ट्रीशीटर की लिस्ट में शामिल हो गए. शहाबुद्दीन 1990 में लालू प्रसाद के राजद में शामिल हुए और 1990 और 1995 में जीत हासिल कर वधानसभा के सदस्य बने. शहाबुद्दीन के खिलाफ लोगों में इतनी दहसत थी कि लोग उनके नाम से ही कांपते थे. 16 मार्च 2001 सीवान पुलिस के लिए एक काला दिन था, क्योंकि शहाबुद्द्दीन ने राजद नेता मनोज कुमार की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को रोका और पुलिस अफसर को थप्पड़ मारा. इस घटना ने बिहार पुलिस को झकझोर कर रख दिया. जिसके बाद पुलिस ने शहाबुद्दीन के गांव तथा घर को घेर कर हमला कर दिया. इस मुठभेड़ में जिसमें कई लोग मारे गए और शहाबुद्दीन घर से भागकर नेपाल पहुंच गया.

2003 में शहाबुद्दीन मो. शहाबुद्दीन वर्ष 1999 में माकपा माले के सदस्य का अपहरण करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन वे स्वास्थय खराब होने का बहाना करके सीवान जिला अस्पताल में रहने लगे और चुनाव की तैयारियां करने लगे. जिसके बाद 2005 में उन्हें रिहाई दे दी गई.

राज्य पुलिस की विशेष टीम के साथ सिवान प्रशासन ने शहाबुद्दीन के घर की छानबीन की जिसमें से कई विदेशी हथियारों सहित पाकिस्तानी पासपोर्ट, ISI से संबंधित कागजात बरामद हुए. जिसके बाद बिहार के डीजीपी डीपी ओझा के निर्देश पर 8 नॉन बेलेबल केस दायर कर वारंट इशू किया गया. और 2009 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया जिसके बाद से वो जेल में ही हैं.

पेट भर खाने के लिए कोर्ट से लगाई थी गुहार

गौरतलब है, कि अभी हाल ही में शहाबुद्दीन ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने पेटभर खाने के लिए गुहार लगाईं है. अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि जब जेल वाले डॉन छोटा राजन को टीवी और किताबों सहित कई सुविधाएं डे रहे हैं, तो ये सुविधा उन्हें क्यों नहीं मिल सकती? याचिका में साफ़ कहा गया है कि 13 महीने में उनका वजन 15 किलो कम हो चुका है. ऐसे में उन्हें डर है कि जेल में कहीं गंभीर बीमारियां उन्हें जकड़ ना लें. उन्हें फिलहाल एकांत कारावास में रखा गया है, जहां से वो आम कैदियों के बीच रहना चाहते हैं.  शहाबुद्दीन पर करीब 45 क्रिमिनल केसेज चल रहे हैं. तिहाड़ जेल में वो तेजाब हत्याकांड की सजा काट रहे हैं. इस याचिका पर 27 अप्रैल तक जवाब दिया जाना है.