News11 Exclusive: बूढ़ा पहाड़ पर ऐसी जिंदगी जीते थे ग्रामीण, प्रशासन को अब कहा धन्यवाद

गुमला: अब फिर से नहीं जायेंगें उस दोज़ख भरी जिंदगी में. एक कसक के साथ यह कहना है उन ग्रामीणों का, जिन्हें नक्सलियों के शरणगाह बूढ़ा पहाड़ पर अवस्थित कई गांव से प्रशासन द्वारा नीचे लाया गया है. यहां उन्हें एक नयी जिंदगी देने की कवायद चल रही है. क्या है पूरी खबर जानने के लिए देखिये यह रिपोर्ट...


कल बेचैन थे. आज चैन है. कल का कोलाहल था, हर वक्त. आज शांति का रैन है. जी हां, कुछ यही बोध कर रहे हैं वो सैकड़ो ग्रामीण जो पहाड़ की दोज़ख भरी जिंदगी से बाहर निकल आज एक सुकून भरे पल को जी रहे हैं. हम बात कर रहे हैं बूढ़ा पहाड़ से लाये गए उन ग्रामीणों की जो आज पहाड़ से कुछ ही दूरी पर अवस्थित मदगड़ी गांव के पंचायत भवन में रह रहे हैं. अब सभी हर सोच से दूर बैठ कर एक दूसरे से बातें करते हैं तो कोई हर फिक्र से बेफिक्र हो चैन की नींद सो रहा है. क्या बूढ़े, क्या बच्चे और महिलाएं. सभी बाकी के बचे खुद के जीवन को सुकून से गुजारने के ख़्वाब में खोए हुए हैं. हमारे किसी भी सवाल का जवाब देने से पहले वो कई बार दुहराते हैं कि अब वो पहाड़ पर फिर नहीं जायेंगें. नहीं जाएंगे वापस उस पार कष्ट भरी जिंदगी में. वह बताते हैं कि नक्सलियों के कारण बहुत कष्ट भरी जिंदगी गुजार रहे थे. आज यहां प्रशासन द्वारा लाये जाने के बाद वह राहत महसूस कर रहे हैं.

 

इन ग्रामीणों ने बातचीत में बताया कि कैसे कभी नक्सलियों के लिए उन्हें कभी खाना बनाना पड़ता. तो कभी उनके लिए कवच बनना तो कभी नक्सलियों द्वारा गांव में धमक देते हुए युवकों को उठा ले जाना. ऐसी कई विषम परिस्थितियों से दो-चार होते हुए ज़लालत भरी जिंदगी गुजारने वाले ग्रामीण आज खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. वो कहते हैं कि हमें उस जीवन से वापस ला कर प्रशासन ने बहुत बढ़िया काम किया है. आज हमें इस पंचायत भवन में रखने के बाद सारी सुविधाएं दी जा रही हैं. उनके अनुसार अगर वह फिर से पहाड़ पर गए तो मार दिए जायेंगे. इसलिए अब वह बाकी की जिंदगी यहीं बसर करेंगे.


उधर अधिकारी की मानें तो ग्रामीणों को अभी रिलीफ़ कैंप के तहत उन्हें पंचायत भवन में रखते हुए सारी सुविधाएं दी जा रही हैं. जल्द ही उन्हें एक अलग महफ़ूज जगह पर बसाया जाएगा.

 

बूढ़ा पहाड़ से नक्सली खात्मा के साथ-साथ समूल नक्सली उन्मूलन की दिशा में प्रशासन का यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है. ऐसे में जरूरत होगी इसी कवायद को जारी रखने की ताकि जहां एक तरफ़ नक्सली उन्मूलन हो वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के दिलों में पुलिस के प्रति विश्वास घर करे.

 

ये भी पढ़ें...

 

खत्म हुआ कर्नाटक का नाटक, बीएस येदियुरप्पा ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

पलामू: पत्रकार की हत्या कर शव लटकाया, जांच में जुटी CID

रिम्स के सर्जरी विभाग से कैदी फरार, सोई रह गई पुलिस