लड़ाई, झगड़ा, लोभ-लालच, द्वेष से दूर रहने का संदेश देता है सोहराई पर्व

सोहराईलोहरदगा : भंडरा प्रखंड के पंडिरीया में सोहराई कार्यक्रम का शुभारंभ जिला परिषद अध्यक्ष सुनैना कुमारी ने किया. कार्यक्रम की शुरूआत फीता काट कर की गयी. सोहराई कार्यक्रम को संबोधित करते हुये जिला परिषद अध्यक्ष सुनैना कुमारी ने कहा कि गांवों के पहान को खूंटा गाड़ कर पूजा किया जाता है. सोहराई में गांव के आस-पास के सभी खोड़हा समिति के लोगों को पारंपरिक वेशभूषा के साथ शामिल किया जाता है. सोहराई जतरा में लोग ढोल, नगाड़े एवं मांदर बजाते हुये झंडे के साथ सामूहिक नृत्य करते हैं. सोहराई कार्यक्रम में रंग-रंग सांस्कृतिक कला का प्रदर्शन किया जाता है. कार्यक्रम में आदिवासी नागपुरी गीत-संगीत प्रस्तुत किया गया. सोहराई पूस महीने में नये फसल के साथ मनाया जाता है. यह पर्व किसी खास तारीक या तिथि को नहीं मनाया जाता है.




उन्होंने कहा कि सभी व्यक्ति के कुशल-मंगल होने पर ही पर्व मनाने का निर्णय लिया जाता है. गांव में सभी के कुशल-मंगल होने पर सोहराय पर्व मनाने के लिए दिन तय किया जाता है. सोहराई घर-घर जाकर सूचित करने का आदेश देते हैं. उसके बाद पहानों के साथ मिलकर खोड़हा समिति और आस-पास के सदस्यों को जाकर सूचित किया जाता है. सोहराय पर्व के दिन स्नान करने का रिवाज है. इसके बाद सभी अपने-अपने रिश्तेदरों को सोहराई पर्व का न्योता देकर बुलाते हैं. पर्व के नाम पर मदिरा तैयार होता है. यह पर्व मुख्य रूप से तीन दिन का होता है, जिसमें पहले दिन को ऊम हीलोक – स्नान या साफ-सफाई का दिन, दूसरे दिन को दाकाय हीलोक – खाने पीने का दिन और तीसरा या अंतिम दिन को अडाक्को हीलोक के रूप में मनाया जाता है. तय किये गए दिन सभी मेहमान जमा होते हैं. इस पर्व में खासकर होपोन एरा शादी-शुदा बहनों को बुलाया जाता है, इसलिए खासकर बेटी और बहनों को पर्व के दिन बुलाते हैं. इस पर्व में मेहमानों का सेवा-सत्कार किया जाता है. सोहराई पर्व में पांच दिन पांच रात नाच गान के जरिए खुशी मनाते हुये लोगों को यह संदेश देते हैं कि वे लड़ाई, झगड़ा, लोभ-लालच, द्वेष न करें. सोहराई में नायके चरवाहों से डंडा मांगते हैं और सभी डंडा को पूजा खण्ड में रखकर तेल सिंदूर देते हैं. उसके बाद चरवाहों को पूजा खण्ड पर गाय खदेडने का आदेश दिया जाता है. उसके बाद गाय पूजा खण्ड में स्थापित अण्डे को सूंघती है. पैर लगाती है, उस गाय का पैर धोया जाता है, तथा उसके सिंघों पर तेल लगाकर सिंदूर दिया जाता है.

ये थे उपस्थित

कार्यक्रम में पंकज मिसरा, सुमित शंकर महतो, सुशील कुमार, रोहित महतो, निरमल कुजूर, रमेश चमा जवारा, संजय इंद्रजीत, बिरसु मनी एवं भारी संख्या में लोग उपस्थित थे.





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