इस्पात मंत्री को मजदूरों से कोई सरोकार नहीं : भारतीय मजदूर संघ

मजदूर

  • इस्पात कामगारों का पेंशन-समझौता नहीं होने पर आक्रोश
  • 30 को भामसं का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन

बोकारो : भारतीय मजदूर संघ (भामसं) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रभारी (कोयला एवं इस्पात) सह एनजेसीएस सदस्य डा. बसंत कुमार राय का कहना है कि चौधरी बीरेंद्र सिंह समय के अनुसार पाला बदलकर कांग्रेस से भारतीय जनता पार्टी में आए हुए नेता है, जो इस्पात मंत्री बने हैं. उन्हें मजदूरों से कोई सरोकार नहीं है. उनका जैसा रवैया है, निश्चित तौर पर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को पूरा नहीं होने देंगे. बोकारो में बुधवार शाम पत्रकारों से एक बातचीत में डॉ. राय ने उक्त बातें कही. मंगलवार को हुई एनजेसीएस की बैठक के आलोक में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. राय ने कहा कि उक्त बैठक मंत्री की बैठक थी. पत्रकार-वार्ता को एनजेसीएस की बैठक का रूप दे दिया गया, जो निश्चित रूप से निराशाजनक रही. इस्पात क्षेत्र में अधिकारियों के लिए तो नौ प्रतिशत का पेंशन निर्धारित कर दिया गया, लेकिन मजदूरों के लिए नहीं किया जा सका. उनका पेंशन मात्र छह प्रतिशत पर ही रहने दिया गया. मंत्री ने तीन वर्ष के बाद कामगारों के वेतन समझौते की बात कही है. उस वक्त क्या होगा, कहना मुश्किल है. इस्पात क्षेत्र के मजदूर आज एक चौराहे पर आ खड़े हुए हैं. इस्पात मंत्रालय को घाटा होने की बात कहकर मजदूरों को बरगलाया जा रहा है. इससे पहले भी स्थिति खराब रही है, जिस समय एरियर के रूप में मजदूरों को उनका पेंशन दिया गया है. लेकिन, इस बार पूरी तरह से इंकार कर देना कहीं से भी सही नहीं है. घाटे का कारण मजदूर नहीं, बल्कि सरकार की अपनी नीति है और इसका खामियाजा मजदूर भला क्यों भुगतें. संसद बंद हो जाने पर क्या सांसदों को उनका वेतन नहीं मिलता?




मजदूरों के साथ दोहरी नीति अपनाई जा रही है

एक सवाल के जवाब में डॉ राय ने कहा कि एक तरफ मोदी सरकार जहां सबका साथ, सबका विकास करने की बात कहती है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों के साथ दोहरी नीति अपनाई जा रही है. आज निश्चित तौर पर मजदूरों के लिए देश में अच्छे दिन नहीं हैं. सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में संवादहीनता आ गई है. मजदूर संगठनों की उपेक्षा की जा रही है और यही विस्फोट का कारण बनेगी. उन्होंने कहा कि कामगारों का पेंशन मामला लटकाए जाने को लेकर भारतीय मजदूर संघ आगामी 30 जुलाई को राष्ट्रीय स्तर पर इस्पात जगत से जुड़े सभी शहरों के मुख्यालयों पर विशाल प्रदर्शन करेगा. इसके बाद भी अगर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो भामसं अगुवा बनकर आगे की लड़ाई लड़ेगा. इस पंचायत के मजदूरों की खस्ता हालत का कारण उन्होंने मजदूर संगठनों में एकजुटता का अभाव भी बताया. एक प्रश्न के जवाब में डॉ. राय ने कहा कि स्टील सेक्टर में इतने अधिक यूनियन बन गए हैं, जितने कि बरसात में मेंढक भी नहीं होते. उन्होंने इंटक, एटक आदि मजदूर संगठनों को अधिकारियों का दलाल बताते हुए कहा कि इनका काम-धाम कुछ नहीं और नतीजा जीरो बटा जीरो है.

पत्रकार वार्ता में डॉ. राय के साथ भामसं के झारखंड प्रदेश महामंत्री बिंदेश्वरी प्रसाद, प्रदेश मंत्री रंजय कुमार, जिला महामंत्री कृष्णा राय, अनिल कुमार, जितेंद्र तिवारी आदि उपस्थित थे.

 

 





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