छात्र संघ चुनाव : कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई एक बार फिर चारो खाने चित

एनएसयूआई रांची : रांची में संपन्न हुए छात्र संघ चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई एक बार फिर चारो खाने चित हो गयी है. रांची विश्वविद्यालय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में हुए चुनाव में एनएसयूआई मात्र एक सीट जीत सकी. जिसने कांग्रेस को चिंता में ला दिया है, दो वर्ष पूर्व हुए छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई खाता भी नहीं खोल पाई थी. कांग्रेस के छात्र इकाई के नेताओं के सारे दावे इस चुनाव में फुस हो गए, जो एनएसयूआई के हवाई संगठन होने की ओर इशारा किया है. हालांकि संगठन अब इसकी समीक्षा की बात कह अपने प्रदर्शन में सुधार की बात कह रहा है. वहीं एनएसयूआई के पूर्व नेता इसे कांग्रेस के लिए उचित संकेत नहीं मानते हैं.

पूरे साल भर तामझाम में व्यस्त हवाई छात्र राजनीति ने कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई की हवा निकाल दी है. रांची विश्वविद्यालय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुए छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई बुरी तरह पीट गयी है. बड़े-बड़े दावों के बाद एक सीट पर एनएसयूआई सिमट कर रह गयी. इसके पीछे की वजह रही एनएसयूआई की हवाई राजनीति इस करारी हार के बाद संगठन इस बात से अपना बचाव कर रहा है कि पिछली बार तो खाता भी नहीं खुला, जबकि इस बार एक जीत और 23 सीटों पर दूसरा स्थान मिला है. एनएसयूआई के राष्‍ट्रीय प्रवक्ता अभिनव भगत ने कहा है कि 13 तारीख को इस हार की समीक्षा होगी.




कांग्रेस के संगठन की रीढ़ यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई को भी माना जाता है. इस बीच इस करारी हार से कांग्रेस के पूर्व छात्र नेता परेशान हैं और इसे पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं बता रहे. एनएसयूआई से राजनीति में आये प्रदेश कांग्रेस के नेता सुरेंद्र सिंह ने कहा है कि ऐसे परिणाम की उम्मीद नहीं थी.

झारखण्ड में लगातार एनएसयूआई का संगठन विवादों में रहा है. अलग-अलग गुट भी इस संगठन में हावी है. ऐसे में इस परिणाम पर कोई आश्चर्य नहीं जता रहा, लेकिन अगर वक्त रहते एनएसयूआई की शैली नहीं सुधरी तो कांग्रेस का आने वाला भविष्य अंधकारमय हो सकता है.





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