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हेमंत के आवास पर हुई महागठबंधन की पहली बैठक, शामिल नहीं हुए डॉ अजय व बाबूलाल

महागठबंधन

रांची : बीजेपी के खिलाफ झारखंड में महागठबंधन की कवायद एक सीढ़ी ऊपर बढ़ गई है. नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार विपक्षी दलों की बैठक हुई. पहली ही बैठक में विपक्षी दलों के बीच सीटिंग सीट पर सहमति बन गई है. मतलब मौजूदा विधानसभा में विपक्षी दलों की संख्या बल के आधार पर महागठबंधन में शामिल दल चुनावी मैदान में होंगे. सीटिंग सीट के बाद बारी दूसरा स्थान पाने वाले दलों की होगी. महागठबंधन की अगली बैठक अगले सात दिनों के अंदर बुलायी गई है, जिसमें सभी दलों के सीट दावेदारों की सूची के साथ शामिल होने का आग्रह किया गया है.

हेमंत सोरेन के आवास पर बुलायी बैठक में विपक्ष के दो बड़े नेता नहीं दिखे. हालांकि कांग्रेस की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय के बजाय विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी के बजाय पार्टी के केन्द्रीय सचिव सरोज सिंह ने पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में हिस्सा लिया. महागठबंधन के लिहाज से मासस को छोड़ बाकी वाम दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा में रही. बावजूद इसके बैठक खत्म होने के बाद विपक्ष के नेता उत्साहित दिखे.

जेवीएम के बागी छह विधायकों की सीट पर दावेदारी को लेकर असंमजस की स्थिति

महागठबंधन की पहली बैठक पर मौजूदा सीट पर सहमति की घोषणा के साथ जेवीएम के बागी छह विधायकों की सीट पर दावेदारी को लेकर असंमजस की स्थिति देखने को मिली. महागठबंधन के नेताओं ने 32 सीटों का फॉमूर्ला समझाते हुए जेएमएम के 19, कांग्रेस के 09, लेफ्ट के 02 और जेवीएम के 02 सीट का जिक्र करते हुए जेवीएम की परेशानी बढ़ा दी. जेवीएम के नेता बैठक के बाद अपनी 08 सीट पर दावा करते दिखे. जबकि सहयोगी दलों ने बागी हुए छह विधायकों के मामले में जमीनी हकीकत जानने की बात कहीं.

बीजेपी के खिलाफ आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए विपक्षी एकजुटता का असर इस बैठक में जरूर देखने को मिला. हेमंत सोरेन के नेतृत्व को स्वीकार करने को लेकर भी किसी भी दल में कोई असंमंजस की स्थिति नहीं दिखी. आरजेडी ने बैठक के बाद हेमंत सोरेन की लीडरशिप में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान किया.

झारखंड में बीजेपी के खिलाफ तमाम विपक्षी दलों को एकता के साथ चुनावी मैदान में उतरना इतना आसान नहीं है. हालांकि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं होता शायद यही वजह है कि नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन महागठबंधन की डोर को मजबूती से थामे लगातार आगे बढ़ने की कोशिश में लगे हैं.

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