कोयला चोरी से सफर तय करने वाला उदेव बना साइबर चोर, चढ़ा पुलिस के हत्‍थे

जामताड़ा : जिले में सौकड़ों साइबर चोर की गिरफ्तारी पुलिस ने अब तक किया है. लेकिन इस बार पुलिस ने जिस साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है उसकी कहानी दिलचस्प ही नहीं दर्दनाक भी है. ये कहानी नारायणपुर थाना क्षेत्र के उदेव की है. जिसे साइबर डीएसपी सुमित कुमार ने लोकनिया गांव से साइबर क्राइम की घटना को अंजाम देते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है.

जब न्‍यूज11 के पत्रकार ने साइबर अपराधी उदेव से बात की तो इस दौरान कई तथ्‍य सामने आयी जो दिलचस्प और दर्दनाक भी है. कैसे उदेव कोयला चोर से साइबर चोर बना. उसने अपनी आप बीती कहानी बतायी. उसने बताया कि‍ वो अधिक पढ़ा-लिखा नहीं है. मात्र तीसरी कक्षा तक ही उसने पढ़ाई की है. जब उसने ये बताया कि‍ वो मात्र तीसरी कक्षा तक पढ़ा है तो उसकी बातों को सुनने का और भी जिज्ञासा बढ़ गया.




उसने बताया कि‍ अपने गांव के सरकारी विद्यालय में पढ़ाई की. उसके बाद कम उम्र में उसके माता-पिता ने उसकी शादी कर दिया. शादी के बाद दो बच्ची ने जन्म लिया. परिवार की ऐसी हालत नहीं थी कि वो अपने दोनों बच्ची और अपने माता-पिता का ठिक से ख्याल रख सके. खेती भी कुछ खास नहीं था. उसके बाद वो कोयला चोरी करने लगा. पिछले दस साल से वो कोयला चोरी का धंधा करते आ रहा है.

जामताड़ा से कोयला चोरी करके नारायणपुर के ईंट भट्ठा में कोयला देने का काम करने लगा. जिससे उसे करीब 1000 रुपया प्रतिदिन मिल जाता था. उसी से उसका और उसके परिवार का जीवन चलने लगा. उसने बताया कि‍ जामताड़ा से कोयला ढोकर नारायणपुर तक ले जाने में उसका सारा दिन बर्बाद हो जाता है. कई टन कोयला साइकिल पर लाद कर जामताड़ा से नारायणपुर तक जाने में उसका शरीर जवाब दे देता था. जिस कारण उसने साइबर क्राइम को अपनाया. महज तीन माह में ही कोयला चोर उदेव साइबर क्राइम की घटना को अंजाम देकर चल और अचल संपत्ति का मालिक है. दिलचस्प बात ये है कि कैसे हम पढ़े-लिखे लोग महज तीसरी पास के झांसे में आकर अपना सब कुछ गंवा बैठते है. उदेव बांग्‍ला और हिंदी बहुत अच्छी तरह से बोलता है. उदेव का टारगेट प्वाइंट बंगाल होता है. वो बंगाल के लोगों को फंसाने का काम करता था.





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