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मसूद पर चीन के वीटो से यूएनएससी के सदस्‍य देश नाराज, कहा- करेंगे दूसरे विकल्‍प पर विचार

संयुक्त राष्ट्र : जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किए जाने पर चौथी बार चीन ने अड़ंगा लगाया है. इससे नाराज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि चीन अपनी इस नीति पर अड़ा रहा तो जिम्मेदार सदस्य परिषद में दूसरे विकल्‍प पर विचार कर सकते हैं. सुरक्षा परिषद के एक दूत ने चीन को असामान्य कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चीन इस कार्य में बाधा पैदा करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं. ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए. दूत ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह कहा. सुरक्षा परिषद में एक अन्य दूत ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ”चीन ने चौथी बार सूची में अजहर को शामिल किए जाने के कदम को बाधित किया है.” चीन को समिति को अपना वह काम करने से रोकना नहीं चाहिए, जो सुरक्षा परिषद ने उसे सौंपा है.

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में होने वाला विचार-विमर्श गोपनीय होता है और इसलिए सदस्य देश सार्वजनिक रूप से इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते. इसलिए दूतों ने भी अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने का आग्रह किया. दूत ने कहा, चीन का यह कदम आतंकवाद के खिलाफ लड़ने और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उसके स्वयं के बताए लक्ष्यों के विपरीत है.

उन्होंने पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय आतंकवादी समूहों और उसके सरगनाओं को बचाने के लिए चीन पर निर्भर रहने को लेकर पाकिस्तान की भी आलोचना की. अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमैन ने चीन के इस कदम को अस्वीकार्य करार दिया और कहा, ” चीन ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र को उस जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने से रोक दिया, जिसने फरवरी में भारत में पुलवामा हमला किया था. मैं चीन से अपील करता हूं कि वह संयुक्त राष्ट्र को अजहर पर प्रतिबंध लगाने दे. हेरिटेज फाउंडेशन के जेफ स्मिथ और अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सदानंद धूमे समेत अमेरिकी थिंक टैंक के कई सदस्यों ने भी चीन के इस कदम की निंदा की.

उल्लेखनीय है कि मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कराने की भारत की कोशिश को बुधवार को उस समय एक और झटका लगा जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसे वैश्विक आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी. फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा सैंक्शन्स कमेटी के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश किया था.

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